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LOON KARAN CHHAJER: नेपाल में भूकम्प की इस त्रासदी के बीच भारत के जैन तेरापंथ के आचार्य महाश्रमण

LOON KARAN CHHAJER: नेपाल में भूकम्प की इस त्रासदी के बीच भारत के जैन तेरापंथ के आचार्य महाश्रमण
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थार एक्सप्रेस का १३ अप्रैल २०१५  का अंक

नेपाल में भूकम्प की इस त्रासदी के बीच भारत के जैन तेरापंथ के आचार्य महाश्रमण

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lkchhajer@yahoo.co.in नेपाल में  भूकम्प की  इस त्रासदी के बीच भारत के जैन तेरापंथ के आचार्य महाश्रमण अपने समाज के साथ घिर गये हैं। आचार्य महाश्रमण तेरापंथ के प्रथम आचार्य हैं जिन्होंने भारत से बाहर  विदेशी क्षेत्र को अपनी पैदल यात्रा के लिए चुना।  वो पिछले एक माह से नेपाल में ही विचरण कर रहें हैं। साध्वीप्रमुखा कनकप्रभा भी नेपाल के वीरगंज क्षेत्र में प्रवास कर रही हैं। इनका आगामी चातुर्मास  भी विराटनगर में घोषित है.  संभवतया आचार्य महाश्रमण ने  नेपाल यात्रा कि घोषणा से पूर्व यह नहीं आंकलन किया गया की  नेपाल   दुनिया के उन देशों में प्रमुख है जहां भूकंप का जोखिम सबसे ज्यादा है। इसका एक बड़ा कारण उसका हिमालयी क्षेत्र में स्थित होना है। इसी पर्वतीय क्षेत्र में भारत का भी एक बड़ा हिस्सा है और इसी कारण नेपाल के साथ-साथ भारत का अच्छा-खासा इलाका भूकंप के लिहाज से जोखिम भरा है। देश के एक बड़े भूभाग समेत बांग्लादेश और तिब्बत के कुछ हिस्सों के बाद सबसे ज्यादा नेपाल में कहर ढाने वाले भूकंप ने प्रकृति के समक्ष मनुष्य को एक बार फिर असहाय रूप में दिखाय...

थार एक्सप्रेस का मार्च प्रथम अंक आपको समर्पित

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THAR EXPRESS 27 FEB 2015

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THAR EXPRESS 13 FEB 2015

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THAR EXPRESS 27 DEC 2014

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थार एक्सप्रेस 13 दिसम्बर 2014

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भगवान महावीर के जीवन दर्शन की प्रासंगिकता

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गंगाशहर। भारतीय दर्शन कहता है कि जो विकसित है उसका दायित्व है कि अविकसित का पालन करे। यह बात डॉ. सुषमा सिंघवी ने आज नैतिकता का शक्तिपीठ पर मुनिश्री राजकरण जी के सान्निध्य में आयोजित संगोष्ठी में कही। भगवान महावीर के जीवन दर्शन की प्रासंगिकता विषय पर आयोजित यह गोष्ठी आचार्य तुलसी शांति प्रतिष्ठान एवं महावीर इंटरनेशनल के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित की गई। मुख्य वक्ता डॉ. सिंघवी ने कहा कि जो लोग यह मानकर चल रहे थे कि भोगवाद के बिना जिया नहीं जा सकता उनके समक्ष भगवान महावीर ने त्याग, तप व संयम का आदर्श प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि महावीर का जीवन यह प्रेरणा देता है कि हम अगर सबल हैं तो निर्बलों को सहायता देने के लिए हैं न कि दिखावा, प्रदर्शन या अभिमान के लिए हैं। भगवान महावीर का बचपन में  निर्भय थे, वो इसी निर्भयता के चलते सांप को भी प्यार से हाथ में उठा लेते थे तथा कहते थे  कि जब मैंने सांप का अहित नहीं किया तो यह मुझे नहीं काटेगा।  डॉ. सुषमा सिंघवी ने कहा कि बच्चों  को निर्भयी बनावें, उनसे उनकी क्षमताओं से अधिक अपेक्षाएं न  पालें। बच्चों को रोटी, कपड़ा ...

SIRIYARI RO SANT PAYARO PYARO LAGE GHAN SUHAO MATA DEEPAN JI RA JAYA

SIRIYARI RO SANT PAYARO PYARO LAGE GHAN SUHAO MATA DEEPAN JI RA JAYA

“दलितों के मसीहा आचार्य तुलसी” पुस्तक का लोकार्पण

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“दलितों के मसीहा आचार्य तुलसी” पुस्तक का लोकार्पण बीकानेर  । महाजन एवं हरिजन की क्या शादि हो सकती है और दलित वर्ग का मन्दिर में प्रवेश होना चाहिए या नहीं इन बातों का आचार्य तुलसी ने क्या उतर दिया व समाज में अस्पृश्यता की भावना को मिटाने में उन्हें कितना व किस तरह का विरोध सहना पड़ा। इन सबको समाहित करते हुए आचार्य तुलसी जन्म शताब्दी समारोह समिति द्वारा प्रकाशित एवं जैन लूणकरण छाजेड़ द्वारा लिखित पुस्तक “दलितों के मसीहा आचार्य तुलसी” में किया गया है। पुस्तक की प्रथम कृति नैतिकता के शक्तिपीठ पर बुधवार को प्रातः सुर्योदय के समय मुनिश्री राजकरण जी को भेंट की गई, मुनिश्री ने मंगलपाठ सुनाने के बाद अपने उद्बोधन में कहा कि आचार्य तुलसी ने 80 वर्ष पूर्व दलितों के जीवन को संवारने का कार्य प्रारम्भ किया था उनके सान्निध्य में अनेक हरिजन सम्मेलन किए गए । मुनिश्री ने कहा कि महाजनों एवं हरिजनों को एक ही जाजम पर बैठाने के लिए श्रेष्ठी वर्ग की मानसिकता को बदला। मुनिश्री राजकरण ने उस समय दलितों के जीवन को संवारने हेतु किए गए कार्यों का स्मरण करते हुए कई संस्मरण सुनाए तथा कहा कि लूणकरण छाजेड़ ...
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तुम्हीं सुनाओ कोई नयी कहानी।।

तुम्हीं सुनाओ कोई नयी कहानी।। नानी तू है प्यारी नानी "हिरी " को सुनाओ नई कहानी। नानी बोली प्यारी नाती नई कहानी मुझे न आती। मेरे पास तो वही कहानी एक था राजा एक थी रानी। नई कहानी कहाँ से लाऊँ तेरा कैसे लाड लड़ाऊँ। तुम चलाओ कम्प्यूटर वाणी तुम हो ज्ञानी के भी ज्ञानी। मैं तो हूँ "हिरी" बस तेरी नानी। तुम्हीं सुनाओ कोई नयी कहानी।।

जो हो रहा है वो अच्छा है ,

जो हो रहा है वो अच्छा है , जो होगा वो अच्छा होगा. पर्भू की इच्छा से ही सब होता है ... उसकी इच्छा से ऊपर कुछ नहीं हमें हमेशा हर हल में संतुष्ट रहना चाहिए यानी पर्भू जो कर रहा है तथा करवा रहा है उसमे हमारा भला ही होगा .

मैं खुशनसीब हूँ की पत्नी से मेरी अब तक पट रही है

मैं खुशनसीब हूँ की  पत्नी से मेरी अब तक पट रही है मैंने पत्नी को और पत्नी में मुझको बहुत चाहा  माता -पिता की सेवा श्रुसेवा चाहत से की  ,  बच्चो का लालन-पालन  दिल से किया   यह नहीं की हमेशा आपस में पटती ही रही नोक-झोंक भी खूब चलती रही पर कभी नाराज़ हुयी कभी उसने मुझे मनाया  कब ,क्यूँ और कैसे ये सब होता गया कब ३५ साल बीत गए यह पता ही नहीं चला अभी तो प्रथम मिलन , शादी और हनीमून की यादें ही नहीं भूले और उम्र हमारी ऐसे ढल गयी जैसे दोपहर का सूरज ढल गया . . सच कहूँ इस ज़िंदगी में बड़ा मज़ा आया  चुहलबाजी में कब जवानी से बुढ़ापा आ गया औलाद हुयी, पापा मम्मी बने , दादा -दादी और नाना -नानी भी बन  गए हमसफ़र ऐसा  मिला, ज़िन्दगी की यात्रा कट रही है मैं खुशनसीब हूँ की  पत्नी से मेरी अब तक पट रही है

LOON KARAN CHHAJER: गोचर को समाप्त करना यह विकास के नाम पर विनाश हो रहा है. ?

LOON KARAN CHHAJER: गोचर को समाप्त करना यह विकास के नाम पर विनाश हो रहा है. ?

गोचर को समाप्त करना यह विकास के नाम पर विनाश हो रहा है. ?

राजनेता और निति निर्माता दूरद्रर्ष्टि से नहीं सोचते.की गोचर नहीं रहेगी तो शहर का पर्यावरण कितना बिगड़ेगा ? गोचर को समाप्त करना यह विकास के नाम पर विनाश हो रहा है. ? सड़क दूर से निकल सकती है वाहन को ही तो जाना है वाहन कुछ दुरी से निकल सकतें हैं. गायें किस वाहन पर सावर होकर चरने जाएगी ? गोचर के मध्य में से सड़क निकालना गोचर के टुकड़े-टुकड़े करना है , वह भी योजना अनुसार नहीं ? गोचर से सड़क निकलना क्या प्रतिदिन दुर्घटनाओं को आमंत्रण नहीं है. ? इसी तरह गंगाशहर में TRETMENT PLANT बना कर गन्दा पानी गोचर में छोड़ कर गायों को अकाल मौत मरना होगा. बीकानेर का जो TRETMENT प्लांट है उसकी क्षमता के अनुसार गन्दा पानी भी नहीं मिल रहा है. अगर गंगाशहर के चांदमल जी बाग़ का पानी पाईप लेन से TRETMENT PLANT तक पहुंचा दिया जाय तो गोचर भी बचेगी व गंदे पानी की समस्या का हल भी हो जायेगा तथा राजनीती भी नहीं होगी ?

महामंत्र- ॐ ह्रीं क्लीं अर्हं वृषभनाथ तीर्थंकराय् नमः

Bhaktamar: भक्त अमर नत मुकुट सु-मणियों, की सु-प्रभा का जो भासक। पाप रूप अति सघन तिमिर का, ज्ञान-दिवाकर-सा नाशक॥ भव-जल पतित जनों को जिसने, दिया आदि में अवलंबन। उनके चरण-कमल को करते, सम्यक बारम्बार नमन ॥१॥ सकल वाङ्मय तत्वबोध से, उद्भव पटुतर धी-धारी। उसी इंद्र की स्तुति से है, वंदित जग-जन मन-हारी॥ अति आश्चर्य की स्तुति करता, उसी प्रथम जिनस्वामी की। जगनामी सुखधामी तद्भव, शिवगामी अभिरामी की ॥२॥ स्तुति को तैयार हुआ हूँ, मैं निर्बुद्धि छोड़ि के लाज। विज्ञजनों से अर्चित है प्रभु! मंदबुद्धि की रखना लाज॥ जल में पड़े चंद्र मंडल को, बालक बिना कौन मतिमान। सहसा उसे पकड़ने वाली, प्रबलेच्छा करता गतिमान ॥३॥ हे जिन! चंद्रकांत से बढ़कर, तव गुण विपुल अमल अति श्वेत। कह न सके नर हे गुण के सागर! सुरगुरु के सम बुद्धि समेत॥ मक्र, नक्र चक्रादि जंतु युत, प्रलय पवन से बढ़ा अपार। कौन भुजाओं से समुद्र के, हो सकता है परले पार ॥४॥ वह मैं हूँ कुछ शक्ति न रखकर, भक्ति प्रेरणा से लाचार। करता हूँ स्तुति प्रभु तेरी, जिसे न पौर्वापर्य विचार॥ निज शिशु की रक्षार्थ आत्मबल बिना विचारे क्या न मृगी? जाती है मृगपति के आगे, प्रेम-...

आचार्य महाश्रमण पदाभिषेक पर्व समाचार

“I will follow the principels,tradition, culture, values, teachings and thoughts of Terapanth, and am abide for the same” said Acharya Mahashraman after formally accepting the charge of 11th Acharya of “Terapanth” at Sardarshahar. He said that it seems that Acharya Mahapragya is motivating him to take such oath and asking him to move ahead firmly. He said that Acharya Shri Tulsi and Acharya Shri Mahapragya has nurtured his personality to the extent that he is now sitting on the chair which was earlier hold by them. Earlier formal Pachhewadi was conferred to Acharya Mahashraman to mark the Acharyatva by Muni Sumermal Sudarshan and he was taken to the chair of Acharya by Muni Balchandji and other Sadhus. Holy mantras and mangalpaath were recited by Sadhu and Sadhvi, who were present there to witness this gracious occasion. Sadhvi Pramukha Kanak Prabhaji, while addressing the gathering, said that there is a tradition in “Terapanth” to follow the Acharya, and remain faithful to Acharya. S...

LOON KARAN CHHAJER: friendship

LOON KARAN CHHAJER: friendship Hi samlani ji kya halchal hai. where are you i am remembring your story "MAHANAGRI ME MAHABHOJ" WISH YOU BEST OF LUCK. LKCHHAJER