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Showing posts from September 21, 2025

प्रेक्षाध्यानः ध्यान का एक अभिनव प्रयोग

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प्रेक्षाध्यानः ध्यान का एक अभिनव प्रयोग जैन परंपरा में प्रेक्षाध्यान एक प्राचीन, विशिष्ट और अभिनव ध्यान-पद्धति है। प्राचीन जैन ग्रंथों से खोजकर, इसका पुनरुद्धार कर और नए प्रयोगों के साथ इसे आधुनिक युगानुकूल बनाकर श्वेतांबर तेरापंथी जैनाचार्य श्री तुलसी, आचार्य श्री महाप्रज्ञ और आचार्य श्री महाश्रमण ने मानव समाज के लिए अतुलनीय योगदान दिया है। इसकी विशिष्टता, विरलता और गहन उपलब्धियों के कारण इसे अभिनव कहा जाता है। प्रेक्षाध्यान का अर्थ 'प्रेक्षा' शब्द संस्कृत की 'ईक्ष' धातु से बना है, जिसका अर्थ है 'देखना'। प्रईक्षा प्रेक्षा, अर्थात् गहराई से देखना। यह विपश्यना के समान है, जिसमें आत्मा द्वारा सूक्ष्म आत्मा, मन द्वारा सूक्ष्म मन, और स्थूल चेतना द्वारा सूक्ष्म चेतना को देखने की साधना की जाती है। 'देखना' ध्यान का मूल तत्व है, इसलिए इस पद्धति को प्रेक्षाध्यान कहा जाता है। चेतना का सामान्य अनुभव तो किया जा सकता है, पर उसे देखना प्रेक्षाध्यान की विशेषता है। भावनाओं को महसूस करने के बजाय उन्हें देखने की साधना भी प्रेक्षाध्यान है। इसके दो सूत्र हैं: 'जानो और द...

संथारा आत्महत्या नहीं, मोक्ष की पावन राह, 76 दिन से तारादेवी बैद की प्रेरक अनशन यात्रा

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 संथारा आत्महत्या नहीं, मोक्ष की पावन राह,  76 दिन से तारादेवी बैद की प्रेरक अनशन यात्रा गंगाशहर, 27 सितंबर 2025। जैन धर्म की पवित्र प्रथा संथारा, जिसे संलेखना भी कहा जाता है, आत्मा की शुद्धि और मोक्ष के मार्ग को प्रशस्त करने वाली एक गहन आध्यात्मिक साधना है। इस प्रथा का जीवंत उदाहरण हैं तारादेवी बैद, जिन्होंने 76 दिनों तक संथारा के माध्यम से अपनी एकाग्रता, सहनशीलता और विनम्रता से सभी को प्रेरित किया है। आज सुबह मुनिश्री कमलकुमार जी और मुनिश्री श्रेयांसकुमार जी ने तारादेवी को दर्शन दिए। तारादेवी ने विनयपूर्वक वंदना कर सुखसाता पूछी, और मुनिश्री द्वारा पूछे गए प्रश्नों—जैसे अरहंतों और सिद्धों के अक्षर, आसोज सुदि का पर्व, और संथारा का दिन—के सटीक उत्तर देकर अपनी मानसिक स्पष्टता का परिचय दिया। मुनिश्री कमलकुमार जी ने इसे एक आदर्श संथारा बताया, जो समुदाय के लिए प्रेरणा का स्रोत बन रहा है। तारादेवी के दर्शन के लिए परिवार, साधु-साध्वियां और दर्शनार्थियों का तांता लगा हुआ है, जो उनकी इस आध्यात्मिक यात्रा को और सार्थक बना रहा है। संथारा क्या है? तेरापंथ महासभा के संरक्षक जैन लूणकरण छाजे...