अणुव्रत प्रणेता आचार्य तुलसी की 30वीं पुण्यतिथि पर विशेष 2 july 2026
अनुशासन , संयम और चेतना के युगपुरुष को भावांजलि मानवता , सांप्रदायिक सद्भाव और महिला सशक्तिकरण को समर्पित रहा युगदृष्टा संत का संपूर्ण जीवन भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक परंपरा में आचार्य तुलसी एक ऐसे युगनायक रहे हैं , जिन्होंने न केवल जैन समाज को नई दिशा दी , बल्कि संपूर्ण मानवता को नैतिक मूल्यों , अहिंसा , अनुशासन और तपस्या की जीवनदृष्टि प्रदान की। आषाढ़ कृष्णा तीज के पावन अवसर पर देश - विदेश में इस महापुरुष की 30 वीं पुण्यतिथि श्रद्धापूर्वक मनाई जा रही है। आचार्य तुलसी ने अपने तपोबल और दूरदर्शी चिंतन से करोड़ो लोगों के जीवन में आत्म - चेतना की अलख जगाई थी। उनका जीवनकाल यह सिखाता है कि वास्तविक साधना केवल जंगलों में नहीं , बल्कि समाज के बीच रहकर मानवीय सरोकारों को पूरा करने में है। जन्म एवं आध्यात्मिक सफर आचार्य तुलसी का जन्म 20 अक्टूबर 1914 को राजस्थान के लाडनूं नगर में हुआ था। मात्र 11 वर्ष की अल्पायु में उन्होंने साधु जीवन म...