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राजस्थान में प्रसूती वार्डों पर बड़ा सवाल: कोटा, बीकानेर, जोधपुर और नागौर-डीडवाना में सिजेरियन के बाद क्यों बिगड़ी माताओं की तबीयत?

  जैन लूणकरण छाजेड़ राजस्थान के प्रसूति गृहों में मौतों का 'रहस्य'; क्या वेंटिलेटर पर जा रही माताओं की जिंदगी के पीछे नकली दवाओं का नेटवर्क? कोटा में फेल हुआ 'ऑक्सीटोसिन' इंजेक्शन, जोधपुर में 'आईवी फ्लूड' पर लगी रोक; जांच रिपोर्टों के इंतजार में थमा सिस्टम राजस्थान का स्वास्थ्य महकमा इन दिनों एक गंभीर और रहस्यमयी संक्रमण के दौर से गुजर रहा है। प्रदेश के पांच प्रमुख जिलों—कोटा, बीकानेर, जोधपुर, नागौर और डीडवाना-कुचामन—में हाल के हफ्तों में सिजेरियन (ऑपरेशन) डिलीवरी के बाद प्रसूताओं की अचानक तबीयत बिगड़ने और मौतों के मामलों ने समूचे राज्य को झकझोर कर रख दिया है। यह गंभीर संकट इसलिए अधिक चिंताजनक बन गया है क्योंकि विभिन्न जांच कमेटियों के गठन के बावजूद अब तक मौत के सटीक कारणों का आधिकारिक खुलासा नहीं हो पाया है। हालांकि, सभी प्रभावित अस्पतालों में इस्तेमाल की जा रही जीवन रक्षक दवाओं और इंजेक्शनों के कुछ खास 'बैच' संदेह के घेरे में हैं, जिससे प्रदेशभर में हड़कंप मचा हुआ है। सभी जिलों में सामने आई घटनाओं में एक डरावनी समानता देखी गई है। प्रसूताओं की तबीयत प्रस...

स्वाध्याय से ज्ञान और ज्ञान से ध्यान

स्वाध्याय से ज्ञान और ज्ञान से ध्यान मानव जीवन की आत्मिक और बौद्धिक यात्रा में तीन बिंदु अत्यंत महत्वपूर्ण हैं — स्वाध्याय , ज्ञान और ध्यान। ये तीनों कोई अलग - अलग मार्ग नहीं हैं , बल्कि एक ही सीढ़ी के क्रमिक सोपान हैं , जो मनुष्य को अज्ञान के अंधकार से निकालकर परम चेतना के प्रकाश की ओर ले जाते हैं। आज की भागदौड़ भरी और तकनीकी रूप से अति - व्यस्त जीवनशैली में , जहाँ सूचनाओं की बाढ़ है लेकिन समझ का अकाल है , इस सूत्र की प्रासंगिकता और अधिक बढ़ गई है। स्वाध्याय का मार्ग स्वाध्याय का सतही अर्थ केवल पुस्तकों का अध्ययन कर लेना मात्र माना जाता है , परंतु इसका वास्तविक और गहरा अर्थ है ' स्वयं का अध्ययन ' करना यानी आत्म - अवलोकन। श्रेष्ठ ग्रंथों , संतों की वाणियों और उच्च विचारों के सान्निध्य में जब हम बैठते हैं , तो वह हमारे भीतर के दर्पण को साफ करता है। स्वाध्याय हमें यह सिखाता है कि हम क्या हैं और हमें क्या होना चाहिए। यह विचारों के ...