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Showing posts from October 4, 2009

friendship

"THE ABC'S OF FRIENDSHIP Always be honest Be there when they need you Cheer them on Don't look for their faults Every chance you get, call Forgive them Get together often Have faith in them Include them Just listen Know their dreams Love them unconditionally Make them feel special Never forget them Offer to help Praise them honestly Quietly disagree Rescue them often Say you're sorry Talk frequently Use good judgment Vote for them Wish them well X-ray yourself first Your word counts Zip your mouth when told a secret"

लूणकरण छाजेड की हरीश भादाणी जी को श्रद्धांजलि

जन कवि हरीश भादाणी का 2 अक्‍टूबर, 2009 को निधन हो गया। मेरी ओर से विनम्र श्रद्धांजलि। हरीश भादाणी जनकवि थे, यह तो सभी जानते हैं। मैंने अपने जीवन में ऐसा एक ही जनकवि देखा है-हरीश भादाणी। जो ठेलों पर खड़े होकर मजदूरों के लिए हाथों से ललकारते हुए गाते थे- बोल मजूरा, हल्ला बोल...। भादाणी जी से मेरे लगभग बीस साल पुराना हैं। हमेशा मेरी न्यूज़ पेपर शॉप से जनसता लेन आते थे । कई बार कुछ चर्चाये भी होती थी। मैने जब अपना अख़बार थार एक्सप्रेस के विशेषांकनिकाले तो इतने बड़े कवि होने के बावजूद हरीश जी ने विशेषांक के लिए कवितायेँ देकर होसला बढाया । हरीश जी के यादों के इतने बक्से हैं कि उन्हें तरतीबवार खोल भी नहीं सकता। भादाणी जी की रचनाओं का मॉडल कहीं दूसरा देखने को नहीं मिलता। उनकी अपनी विशिष्ट शैली थी। वे अपने किस्म के कवि थे। अपने ढंग से जिए और अपने ढंग से चले गए। ऐसा कवि ही लिख सकता है, ‘रोटी नाम सत है, खाए से मुगत है, थाली में परोस ले, हां थाली में परोस ले, दाताजी के हाथ मरोड़ कर परोस ले।‘ भादाणी जी का एक गीत है, ‘मैंने नहीं, कल ने बुलाया है... आदमी-आदमी में दीवार है, तुम्हें छेनियां लेक...