“दलितों के मसीहा आचार्य तुलसी” पुस्तक का लोकार्पण
“दलितों के मसीहा आचार्य तुलसी” पुस्तक का लोकार्पण बीकानेर । महाजन एवं हरिजन की क्या शादि हो सकती है और दलित वर्ग का मन्दिर में प्रवेश होना चाहिए या नहीं इन बातों का आचार्य तुलसी ने क्या उतर दिया व समाज में अस्पृश्यता की भावना को मिटाने में उन्हें कितना व किस तरह का विरोध सहना पड़ा। इन सबको समाहित करते हुए आचार्य तुलसी जन्म शताब्दी समारोह समिति द्वारा प्रकाशित एवं जैन लूणकरण छाजेड़ द्वारा लिखित पुस्तक “दलितों के मसीहा आचार्य तुलसी” में किया गया है। पुस्तक की प्रथम कृति नैतिकता के शक्तिपीठ पर बुधवार को प्रातः सुर्योदय के समय मुनिश्री राजकरण जी को भेंट की गई, मुनिश्री ने मंगलपाठ सुनाने के बाद अपने उद्बोधन में कहा कि आचार्य तुलसी ने 80 वर्ष पूर्व दलितों के जीवन को संवारने का कार्य प्रारम्भ किया था उनके सान्निध्य में अनेक हरिजन सम्मेलन किए गए । मुनिश्री ने कहा कि महाजनों एवं हरिजनों को एक ही जाजम पर बैठाने के लिए श्रेष्ठी वर्ग की मानसिकता को बदला। मुनिश्री राजकरण ने उस समय दलितों के जीवन को संवारने हेतु किए गए कार्यों का स्मरण करते हुए कई संस्मरण सुनाए तथा कहा कि लूणकरण छाजेड़ ...