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प्रेक्षाध्यानः ध्यान का एक अभिनव प्रयोग

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प्रेक्षाध्यानः ध्यान का एक अभिनव प्रयोग जैन परंपरा में प्रेक्षाध्यान एक प्राचीन, विशिष्ट और अभिनव ध्यान-पद्धति है। प्राचीन जैन ग्रंथों से खोजकर, इसका पुनरुद्धार कर और नए प्रयोगों के साथ इसे आधुनिक युगानुकूल बनाकर श्वेतांबर तेरापंथी जैनाचार्य श्री तुलसी, आचार्य श्री महाप्रज्ञ और आचार्य श्री महाश्रमण ने मानव समाज के लिए अतुलनीय योगदान दिया है। इसकी विशिष्टता, विरलता और गहन उपलब्धियों के कारण इसे अभिनव कहा जाता है। प्रेक्षाध्यान का अर्थ 'प्रेक्षा' शब्द संस्कृत की 'ईक्ष' धातु से बना है, जिसका अर्थ है 'देखना'। प्रईक्षा प्रेक्षा, अर्थात् गहराई से देखना। यह विपश्यना के समान है, जिसमें आत्मा द्वारा सूक्ष्म आत्मा, मन द्वारा सूक्ष्म मन, और स्थूल चेतना द्वारा सूक्ष्म चेतना को देखने की साधना की जाती है। 'देखना' ध्यान का मूल तत्व है, इसलिए इस पद्धति को प्रेक्षाध्यान कहा जाता है। चेतना का सामान्य अनुभव तो किया जा सकता है, पर उसे देखना प्रेक्षाध्यान की विशेषता है। भावनाओं को महसूस करने के बजाय उन्हें देखने की साधना भी प्रेक्षाध्यान है। इसके दो सूत्र हैं: 'जानो और द...

संथारा आत्महत्या नहीं, मोक्ष की पावन राह, 76 दिन से तारादेवी बैद की प्रेरक अनशन यात्रा

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 संथारा आत्महत्या नहीं, मोक्ष की पावन राह,  76 दिन से तारादेवी बैद की प्रेरक अनशन यात्रा गंगाशहर, 27 सितंबर 2025। जैन धर्म की पवित्र प्रथा संथारा, जिसे संलेखना भी कहा जाता है, आत्मा की शुद्धि और मोक्ष के मार्ग को प्रशस्त करने वाली एक गहन आध्यात्मिक साधना है। इस प्रथा का जीवंत उदाहरण हैं तारादेवी बैद, जिन्होंने 76 दिनों तक संथारा के माध्यम से अपनी एकाग्रता, सहनशीलता और विनम्रता से सभी को प्रेरित किया है। आज सुबह मुनिश्री कमलकुमार जी और मुनिश्री श्रेयांसकुमार जी ने तारादेवी को दर्शन दिए। तारादेवी ने विनयपूर्वक वंदना कर सुखसाता पूछी, और मुनिश्री द्वारा पूछे गए प्रश्नों—जैसे अरहंतों और सिद्धों के अक्षर, आसोज सुदि का पर्व, और संथारा का दिन—के सटीक उत्तर देकर अपनी मानसिक स्पष्टता का परिचय दिया। मुनिश्री कमलकुमार जी ने इसे एक आदर्श संथारा बताया, जो समुदाय के लिए प्रेरणा का स्रोत बन रहा है। तारादेवी के दर्शन के लिए परिवार, साधु-साध्वियां और दर्शनार्थियों का तांता लगा हुआ है, जो उनकी इस आध्यात्मिक यात्रा को और सार्थक बना रहा है। संथारा क्या है? तेरापंथ महासभा के संरक्षक जैन लूणकरण छाजे...

चातुर्मास: तप, साधना और संयम का पावन काल-

 चातुर्मास (अर्थात् चार महीने) वर्षा ऋतु के दौरान आने वाली वह धार्मिक अवधि है जो हिंदू, जैन और बौद्ध धर्मों में आत्म-शुद्धि, संयम और साधना के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है। यह अवधि हर वर्ष आषाढ़ शुक्ल एकादशी से कार्तिक शुक्ल एकादशी तक होती है। चातुर्मास त्याग और तपस्या ही सच्चे सुख का आधार हैं, और संयम से ही आत्मा का उध्दार संभव है। चातुर्मास का धार्मिक महत्व विष्णु शयन की परंपरा (हिंदू धर्म) इस दौरान माना जाता है कि भगवान विष्णु क्षीरसागर में योगनिद्रा में चले जाते हैं। इसलिए शुभ कार्य जैसे विवाह, गृह प्रवेश आदि इस अवधि में नहीं किए जाते। तप और संयम का समय (जैन धर्म) जैन धर्म में चातुर्मास का विशेष स्थान है। जैन साधु-साध्वियाँ इस समय विहार वर्जना (यात्रा न करना) का पालन करते हैं और एक ही स्थान पर रहकर तप, स्वाध्याय, और प्रवचन करते हैं। यह काल श्रावकों के लिए भी व्रत, संयम और धर्माराधना का अनुपम अवसर है।  चातुर्मास के व्यावहारिक कारण वर्षा ऋतु की कठिनाई: प्राचीन समय में कीचड़ और नदी-नालों के उफान से यात्रा जोखिम भरी होती थी।  सूक्ष्म जीवों की रक्षा: बरसात में उत्पन्न...

आचार्य तुलसी की पुण्यतिथि पर विशेष आलेख

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अनुशासन , धर्म, संयम और चेतना के युगपुरुष को श्रद्धांजलि भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक परंपरा में आचार्य तुलसी एक ऐसे युगनायक रहे हैं, जिन्होंने न केवल जैन समाज को नई दिशा दी, बल्कि संपूर्ण मानवता को नैतिक मूल्यों, अहिंसा, अनुशासन और तपस्या की जीवनदृष्टि प्रदान की।आषाढ़ कृष्णा तीज  को हम  महापुरुष आचार्य तुलसी  की पुण्यतिथि मनाते हैं, जिन्होंने अपने तपोबल और चिंतन से हजारों-लाखों लोगों के जीवन में चेतना की अलख जगाई। इस वर्ष 2025 म में यह पुण्यतिथि 14 जून को देश - विदेश में मनायी जायेगी।  जीवन परिचय आचार्य तुलसी का जन्म 20 अक्टूबर 1914 को राजस्थान के लाडनूं नगर में हुआ। 11 वर्ष की अल्पायु में ही वे साधु जीवन में प्रविष्ट हुए और 1936 में मात्र 22 वर्ष की आयु में आचार्य पद पर अभिषिक्त हुए। यह पद उन्होंने जैन श्वेतांबर तेरापंथ धर्मसंघ के नवां आचार्य के रूप में संभाला। उनका नेतृत्व एक आध्यात्मिक क्रांति का प्रतीक बना। एक नया आलोक: अणुव्रत आंदोलन आचार्य तुलसी का सबसे महत्वपूर्ण योगदान 'अणुव्रत आंदोलन' की स्थापना था। इस आंदोलन का उद्देश्य  सामान्य जन को धार्मिक कठोरत...

जीवन में ईमानदारी का प्रभाव importance of honesty in life

जीवन में ईमानदारी का प्रभाव ईमानदारी न केवल एक व्यक्तिगत गुण है, बल्कि यह परिवार और समाज के साथ व्यक्ति के संबंधों को गहराई से प्रभावित करती है। एक ईमानदार व्यक्ति अपने आध्यत्मिक , पारिवारिक, व्यापारिक और सामाजिक दायित्वों को निष्ठा और समर्पण के साथ निभाता है, जिससे उसके रिश्ते अधिक प्रगाढ़ और विश्वासपूर्ण बनते हैं।  ईमानदारी से व्यक्ति निर्भीक और निडर बन जाता है। अपने प्रोफेशन के प्रति जो मनुष्य  हमेशा ईमानदार रहता है वह जीवन में ऊंचाइयों को छूता है।  ईमानदार व्यक्ति: समाज की रीढ़ ईमानदारी मनुष्य का सबसे श्रेष्ठ गुण है, जो उसे न केवल एक अच्छा इंसान बनाता है, बल्कि समाज और राष्ट्र की उन्नति में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। ईमानदार व्यक्ति सत्यनिष्ठ, पारदर्शी और नैतिक मूल्यों से परिपूर्ण होता है। वह न केवल अपने लिए, बल्कि अपने परिवार, समाज और देश के लिए भी आदर्श प्रस्तुत करता है। आज के समय में, जब भ्रष्टाचार और स्वार्थपरता बढ़ रही है, ईमानदारी का महत्व और भी अधिक बढ़ जाता है। व्यक्तिगत जीवन में ईमानदारी का प्रभाव ईमानदार व्यक्ति अपने विचारों, शब्दों और कर्मों में पारदर्...

तुलसी की अजर -अमर स्मृतियां - तुलसी की शक्तिपीठ

  तुलसी की अजर -अमर स्मृतियाँ - तुलसी की शक्तिपीठ जैन त्रिपंथ धर्म संघ के नवम तुलसी आचार्य का महाप्रायण 23 जून 1997 आषाढ़ कृष्ण तृतीया वि.सं. 2054 आषाढ़ बदी 3 को हुआ। तुलसी के महाप्रयाण के बाद उनके अन्तिम संस्कार स्थल पर आचार्य श्री महाप्रज्ञ जी ने इस परिसर का नाम "नैतिकता का शक्तिपीठ" रखा। आचार्य श्री महाश्रमण जी ने इसे "तुलसीधाम" कहा था, जो आज भी इसी रूप में प्रतिष्ठित है। तुलसी समाधि स्थल के आचार्य प्रदत्त नैतिक नैतिकता के विकास प्रचार-प्रसार की प्रेरणा देते हैं, यह शक्तिपीठ की स्थापत्य कला अपनी वैशिष्ट्यता के लिए है, यह समाधि स्थल साधकों के लिए आराधना और ध्यान-साधना की उपयुक्त तपस्थली है। ।। तुलसी की अंतिम संस्कार स्थली पर निर्मित इस समाधि स्थल का भंडार 1 सितंबर 2000 को हुआ, समाधि स्थल परिसर में 30 हजार वर्ग फुट के गोल घेरे में मूल समाधि स्थापित है, इसके शिखर पर चारों दिशाओं में आचार्य लगे हुए हैं तुलसी के विभिन्न मुद्राओं में रेखाचित्र उनकी स्मृतियों को स्थापित कर रहे हैं, उल्लेख यह भी है कि समाधि स्थल की अंतःस्थ भूमि में एक अस्थि-कलश स्थापित है, यह अस्थि-कलश अ...

चेतना के जागरण के लिए समता की साधना आवश्यक

  चेतना के जागरण के लिए समता की साधना आवश्यक  जैन लूणकरण छाजेड़ हमारे भीतर अनन्त चेतना का स्त्रोत प्रवाहित हो रहा हेै। अपने आपको उस स्त्रोत में आप्लावित रखने के लिए उस स्त्रोत को देखना आवश्यक है। जो उस स्त्रोत को देख लेता हेैं उसके आस-पास मैत्री की धाराएं फूट पड़ती  हैं । मै़त्रीभाव विश्व -बन्धुत्व का पहला सूत्र है। जो व्यक्ति प्रतिक्षण जागृत रहता हैं  और द्वेषभाव से दूर रहता है, वह प्रशस्त जीवन जी सकता है। प्रशस्त जीवन का अर्थ है ऋजुता और मृदुता का विकास।  ऋजु और मृदु व्यक्ति समभाव की साधना कर सकता है। जो समभाव की साधना करता है वह आत्मभाव को प्राप्त होता है और आत्मभाव ही अनन्त चेतना का जागरण है। समभाव शब्द समान दृष्टिकोण या निष्पक्षता का प्रतीक है। इसका अर्थ है हर परिस्थिति, व्यक्ति या घटना के प्रति समान दृष्टिकोण रखना, चाहे वह सुखद हो या कष्टप्रद। समभाव का अभ्यास करने से हम द्वेष, पक्षपात या भेदभाव से ऊपर उठते हैं, और अपने मन को शांति और स्थिरता की ओर अग्रसर करते हैं। अनन्त चेतना  हमारी आत्मा या ब्रह्मांडीय चेतना की उच्चतम अवस्था को दर्शाता है। अनन्त चेतना ...

आसक्ति से मुक्ति का साधन प्रेक्षा ध्यान

आसक्ति से मुक्ति का साधन प्रेक्षाध्यान राग और द्वेष से अलग हो जाना अनासक्ति है। मनुष्य आदतन आसक्ति और विरक्ति के मध्य झूलता है। या तो वह किसी चीज की ओर आकर्षित होता है या विकर्षित, परंतु वह यह नहीं जानता कि इन दोनों से बड़ी बात है कि कर्तव्य कर्म करते समय निस्पृह  भाव में चले जाना। यही अनासक्त भाव है।  विरक्ति वास्तव में आसक्ति का दूसरा हिस्सा है। आज जिस वस्तु के प्रति आसक्ति है, कल उससे विरक्ति हो सकती है। अनासक्ति इन दोनों से ऊपर है। अनासक्ति की भावदशा में चीजें हमें न बुलाती हैं और न भगाती हैं। हम दोनों के मध्य अनासक्त खड़े हो जाते हैं। बुद्ध ने इसे 'उपेक्षा' कहा है। न कोई राग है और न विराग। भोगवाद और वैराग्यवाद दोनों अतियां हैं। भोग में वैराग्य का भाव ही निष्काम कर्म है। भोजन तो करना ही है। जरूरत है भोजन में त्याग का भाव। भोजन में स्वाद की तलाश करना बुरा है। अनासक्त साधक सांसारिक घटनाओं का केवल साक्षी है- तटस्थ द्रष्टा है। वह एक गवाह की तरह जिंदगी में विचरता है। उसके भीतर न चिंता है, न दुःख  है और न ही द्वन्द की तरंगें। अनासक्त कर्मयोगी के जीवन में जो तरंगें उठती हैं, व...

दमयन्ती की दुनिया - प्री-वेडिंग शूट

दमयन्ती की दुनिया - प्री-वेडिंग शूट :  रिंकी की दोस्त आरती अपने प्री-वेडिंग शूट को लेकर बहुत उत्साहित है। आखिर हो भी क्यों ना... उसके ससुराल वाले भले पारम्परिक (दकायानूसी) विचार वाले हों पर प्री-वेडिंग शूट पर कुछ भी करने-पहनने पर उन्हें कोई आपत्ति नहीं है। कहते हैं- घर में हम पारम्परिक हैं, पर बाहर हम आजाद ख्यालात के हैं। ऐसे विचार वास्तव में प्रशंसा योग्य हैं कि घालमेल करने में वे कितने एक्सपर्ट हैं। हमारे समाज सुधारक सर्वांगीण विकास के लिए भले कितनी मशक्कत कर रहे हों, पर बिना कुछ प्रयास किये शादी-ब्याह के आयोजनों ने कितना विकास और आधुनिकीकरण किया है। इससे समाज सुधारक सन्तुष्ट हो सकते हैं। प्री-वेडिंग शूट हमारे शादी-ब्याह में होने वाले रीति-रिवाजों के विकास में एक मील का पत्थर है। हमारे जमाने से लेकर अब तक शादी-ब्याह के रीति-रिवाजों ने कितना विकास किया, वर-वधू के परिवारों की सोच में कितने नये कीर्तिमान स्थापित किये, वेडिंग के स्वरूप को कितना डिफरेंट लुक दिया गया... यह सब दिखता है। जैसे फैशन लुक, वैन्यू की सजावट, थीम कलचर और सबसे खास पैकिंग या प्रजेन्टेशन... मोल को अनमोल बनाने के न...

दमयन्ती की दुनिया - काशी में कोई गधा नहीं होता

दमयन्ती की दुनिया - काशी में कोई गधा नहीं होता : नयनतारा छलाणी सासू माँ हाल ही में काशी दर्शन करके क्या लौटी कि हमारे घर में https://www.tharexpressnews.com/indiaonlinenews/There-is-no-donkey-in-Kashi_20374.html

LIC के पॉलिसी होल्डर्स व SBI के खाताधारकों को धोखा न दे सरकार

LIC के पॉलिसी होल्डर्स व SBI के खाताधारकों को धोखा न दे सरकार : जिंदगी के साथ थी अब अडाणी के साथ है  अडाणी का नैतिक रूप से सही होने

UN में पाकिस्तान की धज्जियां उड़ने वाली भारत की बेटी को सलाम

UN में पाकिस्तान की धज्जियां उड़ने वाली भारत की बेटी को सलाम : Sneha Dubey Indian Diplomat : कौन है भारत की वो अफसर बेटी , जिसने UN में उड़ा दी पाकिस्तान  की धज्जियां न्यूयॉर्क, सितंबर 25: संयुक्त राष्ट्र महासभा में शुक्रवार को भारत और पाकिस्तान के बीच शब्दों के युद्ध में भीषण झड़पें

उत्तेजना अपने आप में हिंसा क्यूंकि मन से भी होती है हिंसा

हिंसा एक समस्या है। यह ऐसी समस्या है, जो भूतकाल  में थी, वर्तमान में है और भविष्य  में नहीं होगी, ऐसा विश्वास नहीं है। हिंसा कब होती है, क्यों होती है, कैसे होती है और इसकी परिणति किस रूप में होती है ? इन सारे सवाल के समाधान में आचार्य तुलसी कहते  हैं कि  हिंसा होने का कोई काल निर्धारित नहीं होता। वह कभी भी और कहीं भी घटित हो सकती है। क्योंकि हिंसा का उपादान आदमी के भीतर रहता है। छोटा-सा निमित्त मिलते ही वह उभर कर बाहर आ जाता है। ढेर सारे घास में एक छोटी-सी चिनगारी रख दी जाए तो पूरी घास भस्मसात हो जाती है। हिंसा की आग भी छोटा-सा निमित्त मिलते ही भभक उठती है। उस आग पर काबू पाना कठिन हो जाता है। हिंसा  होने का मूलभूत कारण है हिंसा के संस्कार। वे संस्कार एक जन्म से नहीं, जन्म-जन्म से संचित होते हैं। अपने विचारों और हितों के प्रतिकूल बात सामने आने पर वे संस्कार उत्तेजित होते हैं। उत्तेजना अपने आप में हिंसा है। उसके कारण हिंसा का स्थूल रूप भी सामने आ जाता है। हिंसा शस्त्र से ही हो, यह आवश्यक नहीं है। मन में हिंसा हो सकती है, वाणी से हिंसा हो सकती है, शरीर से हिंसा हो...

14 दिनों की न्यायिक हिरासत में गए विधायक

14 दिनों की न्यायिक हिरासत में गए विधायक : नयी दिल्ली , 11 जनवरी।  आम आदमी पार्टी के विधायक सोमनाथ भारती को 14 दिन के न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। सोमनाथ भारती ने कहा है कि मेरी जमानत अर्जी 13 जनवरी तक पेंडिग रखी गई है

दुनिया में सबसे ज्यादा कर के कारण पेट्रोल-डीजल सबसे ज्यादा महंगा भारत में

दुनिया में सबसे ज्यादा कर के कारण पेट्रोल-डीजल सबसे ज्यादा महंगा भारत में : प्रस्तुतकर्ता -​​​​​-मनीष छाजेड़ भारत अपनी जरूरत का 85 फीसदी से ज्यादा कच्चा तेल बाहर से खरीदता है। कच्चा तेल बैरल में आता है। एक बैरल यानी 159 लीटर। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत अभी मिनरल वाटर के एक

सुराणा के निधन  पर जैन महासभा ने कहा उनकी स्मृति में चिर स्थाई आयाम बने

सुराणा के निधन  पर जैन महासभा ने कहा उनकी स्मृति में चिर स्थाई आयाम बने : बीकानेर 29  नवम्बर।  जैन महासभा बीकानेर ने माणिक चन्द सुराणा की स्मृति सभा जैन पब्लिक स्कूल में आयोजित की।  सभा  में समाज के सभी घटकों  ने भाग लिया तथा उन्हें पुष्पांजलि व भावांजलि अर्पित  करते हुए कहा कि  उनकी स्मृति

बीकानेर के बच्चों द्वारा बनाए गए मॉडल एरोप्लेन की सफल टेस्टिंग

बीकानेर के बच्चों द्वारा बनाए गए मॉडल एरोप्लेन की सफल टेस्टिंग : बीकानेर। शनिवार को सार्दुल स्पोर्ट्स स्कूल के प्रांगण में लर्निंग बाय डूइंग संस्था और ऐरोमोडलर एसोसिएशन, इंडिया के सयुंक्त तत्वावधान में बीकानेर के बच्चों द्वारा बनाए गए मॉडल एरोप्लेन की सफल टेस्टिंग और ऐरोमोडल शो किया गया। यह एरो मॉडल

कोरोना और शादी- संकट घटता नहीं,बढ़ता ही है

कोरोना और शादी- संकट घटता नहीं,बढ़ता ही है : कोरोना और शादी - संकट घटता नहीं , बढ़ता ही है       चातुर्मास समाप्ति पर है और  बुधवार 25 वम्बर देव उठनी ग्यारस  को शुभ मुहूर्त माना गया है अतः खूब सारे विवाह  तथा अन्य मांगलिक समारोह  होने

असांप्रदायिक धर्म के व्याख्याता आचार्य श्री तुलसी

असांप्रदायिक धर्म के व्याख्याता आचार्य श्री तुलसी : 107 वें जन्म दिवस पर विशेष भारत देश वीर और वीरांगनाओं की जन्मभूमि है। इस धरती पर अनेक वीरों ने जन्म लेकर देश का गौरव बढ़ाया है। उसी क्रम में जैन श्वेतांबर तेरापंथ धर्मसंघ के नवमाधिशास्ता आचार्य श्री तुलसी का नाम

आठ पाकिस्‍तानी सैनिक ढेर, पांच भारतीय जवान भी शहीद

आठ पाकिस्‍तानी सैनिक ढेर, पांच भारतीय जवान भी शहीद : सेना ने पाक के कई लॉन्‍चिंग पैड, तेल डिपो किए तबाह, आठ पाकिस्‍तानी सैनिक ढेर, पांच भारतीय जवान भी शहीद, PM मोदी ने कही यह बात श्रीनगर, 13  नवम्बर । (एजेंसियां )  भारतीय सेना ने केरन सेक्टर में पाकिस्‍तान की बार्डर