मंगलवार को आया भूकंप तीन जगहों पर केंद्रित होने के कारण बहुत बड़े नुकसान से बच तो गए परन्तु आफ्टर शॉक आने का सिलसिला जारी रहेगा। इस खबर से भारत व नेपाल में सभी लोग चिंतित है. जैन तेरापंथ के धर्माचार्य आचार्य महाश्रमण का प्रवास काठमांडो में होने के कारण भारत व विदेशों में रह रहे उनके अनुयायिओं में भय व आशंका का माहौल बना हुआ है. देश - विदेश से आचार्य महाश्रमण जी को अनुरोध किया जा रहा है की संघ के लिए विहार का त्वरित निर्णय लिया जाये. जबकि नेपाल के लोगोँ का सोचना और कहना है की ऋषि भगवान के रूप में आये हैं इसलिए हम बड़े नुकसान से बार -बार बच रहें हैं। भूकम्प त्रासदी का इतिहास देखा जाए तो इक्कयासी साल पहले वर्ष 1934, फिर वर्ष 2015 (25, 26 अप्रैल और 12 मई) में आए तेज भूकंप से पृथ्वी की भौगोलिक स्थिति बदल गई है। अब इंडियन-यूरेशियन प्लेट अपने स्थान से करीब 20 फीट यानी छह मीटर दक्षिण की ओर खिसक गई हैं। इसका असर भारत, नेपाल पर पड़ा है। दोनों देशों के मेन फ्रंटल थ्रस्ट फॉल्ट (एमएफटीएफ) में भी बदलाव आया है। इसक...