संथारा आत्महत्या नहीं, मोक्ष की पावन राह, 76 दिन से तारादेवी बैद की प्रेरक अनशन यात्रा गंगाशहर, 27 सितंबर 2025। जैन धर्म की पवित्र प्रथा संथारा, जिसे संलेखना भी कहा जाता है, आत्मा की शुद्धि और मोक्ष के मार्ग को प्रशस्त करने वाली एक गहन आध्यात्मिक साधना है। इस प्रथा का जीवंत उदाहरण हैं तारादेवी बैद, जिन्होंने 76 दिनों तक संथारा के माध्यम से अपनी एकाग्रता, सहनशीलता और विनम्रता से सभी को प्रेरित किया है। आज सुबह मुनिश्री कमलकुमार जी और मुनिश्री श्रेयांसकुमार जी ने तारादेवी को दर्शन दिए। तारादेवी ने विनयपूर्वक वंदना कर सुखसाता पूछी, और मुनिश्री द्वारा पूछे गए प्रश्नों—जैसे अरहंतों और सिद्धों के अक्षर, आसोज सुदि का पर्व, और संथारा का दिन—के सटीक उत्तर देकर अपनी मानसिक स्पष्टता का परिचय दिया। मुनिश्री कमलकुमार जी ने इसे एक आदर्श संथारा बताया, जो समुदाय के लिए प्रेरणा का स्रोत बन रहा है। तारादेवी के दर्शन के लिए परिवार, साधु-साध्वियां और दर्शनार्थियों का तांता लगा हुआ है, जो उनकी इस आध्यात्मिक यात्रा को और सार्थक बना रहा है। संथारा क्या है? तेरापंथ महासभा के संरक्षक जैन लूणकरण छाजे...
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