आराधना की 68 दिनों की तपस्या की सम्पनता

हैदराबाद के ज्वैलर्स की 13 वर्षीय बेटी आराधना की 68 दिनों की तपस्या की सम्पनता के बाद उसकी मृत्यु हो गयी जिसको लेकर बवाल मचाया हुआ है की आराधना की ह्त्या कर दी गयी.  आराधना को तपस्या किसी ने जबरदस्ती नहीं करवाई।  उच्च आत्मबल के कारण ही  इतनी लम्बी तपस्या हुयी। आराधना ने इससे पहले भी  लम्बी लम्बी तपस्यां की थी. यह तो मृत्यु का दिन तय था और संयोग बन गया की तपस्या के बाद उसकी मृत्यु हो गयी।  जबरदस्ती तपस्या कोई नही कर सकता है व न ही करवाई जा सकती है . लाखों लोग तपस्या करतें हैं और लम्बी लम्बी तपस्या कर रहें है वर्षों से कर रहें है कभी किसी की तपस्या के कारन मृत्यु नहीं हुयी।  यह धार्मिक मान्यता व परम्परा है जिसको विधिपुर्वक किया जाता है .तपस्या की परम्परा भगवन ऋषभनाथ के समय से चली आ रही है अर्थात सृष्टि के निर्माण के समय से तपस्या हर धर्म मे होती आये है । इस घटना को लेकर मीडिया जो हत्या की घटना बनाकर जो मिथ्या प्रचार कर रहा उससे मीडिया को बचना चाहिए। यह कोई अंध विश्वास नहीं है।  इसकी न तो बलि ली गयी है और नहीं उसने बलि दी है। जबकि  यह नेचुरल मृत्यु है जिसको ह्त्या कहकर व महिमामंडन करने की रतन लगाकर  मीडिया स्वयं कटघरे में खड़ा हो रहा है.  घटना की जानकारी जनता तक पहुँचाना उसके तथ्यपूरक प्रसतुति होनी चाहिए परन्तु अपनी TRP बढ़ने के चक्र में मिर्च मशाला लगाकर तड़के वाली खबर बनाना भी पिट पत्रकारिता की ही श्रेणी मई आएगा। आराधना का तप अनुमोदनीय  है.  अनावश्यक मिथ्या प्रचार करके जैन मतावलम्बियों को उकसाने का प्रयास नहीं करें।
-लूण करण छाजेड़ 

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