गंगाशहर। भारतीय दर्शन कहता है कि जो विकसित है उसका दायित्व है कि अविकसित का पालन करे। यह बात डॉ. सुषमा सिंघवी ने आज नैतिकता का शक्तिपीठ पर मुनिश्री राजकरण जी के सान्निध्य में आयोजित संगोष्ठी में कही। भगवान महावीर के जीवन दर्शन की प्रासंगिकता विषय पर आयोजित यह गोष्ठी आचार्य तुलसी शांति प्रतिष्ठान एवं महावीर इंटरनेशनल के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित की गई। मुख्य वक्ता डॉ. सिंघवी ने कहा कि जो लोग यह मानकर चल रहे थे कि भोगवाद के बिना जिया नहीं जा सकता उनके समक्ष भगवान महावीर ने त्याग, तप व संयम का आदर्श प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि महावीर का जीवन यह प्रेरणा देता है कि हम अगर सबल हैं तो निर्बलों को सहायता देने के लिए हैं न कि दिखावा, प्रदर्शन या अभिमान के लिए हैं। भगवान महावीर का बचपन में निर्भय थे, वो इसी निर्भयता के चलते सांप को भी प्यार से हाथ में उठा लेते थे तथा कहते थे कि जब मैंने सांप का अहित नहीं किया तो यह मुझे नहीं काटेगा। डॉ. सुषमा सिंघवी ने कहा कि बच्चों को निर्भयी बनावें, उनसे उनकी क्षमताओं से अधिक अपेक्षाएं न पालें। बच्चों को रोटी, कपड़ा ...