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THAR EXPRESS 27 DEC 2014

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थार एक्सप्रेस 13 दिसम्बर 2014

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भगवान महावीर के जीवन दर्शन की प्रासंगिकता

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गंगाशहर। भारतीय दर्शन कहता है कि जो विकसित है उसका दायित्व है कि अविकसित का पालन करे। यह बात डॉ. सुषमा सिंघवी ने आज नैतिकता का शक्तिपीठ पर मुनिश्री राजकरण जी के सान्निध्य में आयोजित संगोष्ठी में कही। भगवान महावीर के जीवन दर्शन की प्रासंगिकता विषय पर आयोजित यह गोष्ठी आचार्य तुलसी शांति प्रतिष्ठान एवं महावीर इंटरनेशनल के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित की गई। मुख्य वक्ता डॉ. सिंघवी ने कहा कि जो लोग यह मानकर चल रहे थे कि भोगवाद के बिना जिया नहीं जा सकता उनके समक्ष भगवान महावीर ने त्याग, तप व संयम का आदर्श प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि महावीर का जीवन यह प्रेरणा देता है कि हम अगर सबल हैं तो निर्बलों को सहायता देने के लिए हैं न कि दिखावा, प्रदर्शन या अभिमान के लिए हैं। भगवान महावीर का बचपन में  निर्भय थे, वो इसी निर्भयता के चलते सांप को भी प्यार से हाथ में उठा लेते थे तथा कहते थे  कि जब मैंने सांप का अहित नहीं किया तो यह मुझे नहीं काटेगा।  डॉ. सुषमा सिंघवी ने कहा कि बच्चों  को निर्भयी बनावें, उनसे उनकी क्षमताओं से अधिक अपेक्षाएं न  पालें। बच्चों को रोटी, कपड़ा ...

SIRIYARI RO SANT PAYARO PYARO LAGE GHAN SUHAO MATA DEEPAN JI RA JAYA

SIRIYARI RO SANT PAYARO PYARO LAGE GHAN SUHAO MATA DEEPAN JI RA JAYA

“दलितों के मसीहा आचार्य तुलसी” पुस्तक का लोकार्पण

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“दलितों के मसीहा आचार्य तुलसी” पुस्तक का लोकार्पण बीकानेर  । महाजन एवं हरिजन की क्या शादि हो सकती है और दलित वर्ग का मन्दिर में प्रवेश होना चाहिए या नहीं इन बातों का आचार्य तुलसी ने क्या उतर दिया व समाज में अस्पृश्यता की भावना को मिटाने में उन्हें कितना व किस तरह का विरोध सहना पड़ा। इन सबको समाहित करते हुए आचार्य तुलसी जन्म शताब्दी समारोह समिति द्वारा प्रकाशित एवं जैन लूणकरण छाजेड़ द्वारा लिखित पुस्तक “दलितों के मसीहा आचार्य तुलसी” में किया गया है। पुस्तक की प्रथम कृति नैतिकता के शक्तिपीठ पर बुधवार को प्रातः सुर्योदय के समय मुनिश्री राजकरण जी को भेंट की गई, मुनिश्री ने मंगलपाठ सुनाने के बाद अपने उद्बोधन में कहा कि आचार्य तुलसी ने 80 वर्ष पूर्व दलितों के जीवन को संवारने का कार्य प्रारम्भ किया था उनके सान्निध्य में अनेक हरिजन सम्मेलन किए गए । मुनिश्री ने कहा कि महाजनों एवं हरिजनों को एक ही जाजम पर बैठाने के लिए श्रेष्ठी वर्ग की मानसिकता को बदला। मुनिश्री राजकरण ने उस समय दलितों के जीवन को संवारने हेतु किए गए कार्यों का स्मरण करते हुए कई संस्मरण सुनाए तथा कहा कि लूणकरण छाजेड़ ...